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एक किसान की मन की बात
कहते हैं..

इन्सान सपना देखता है
 तो वो ज़रूर पूरा होता है.
मगर
 किसान के सपने
 कभी पूरे नहीं होते।

बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है, और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है।

बड़ा खुश होते हुए जाता है...

बच्चों से कहता है...
आज तुम्हारे लिये नये कपड़े लाऊंगा फल और मिठाई भी लाऊंगा।।

पत्नी से कहता है..
तुम्हारी साड़ी भी कितनी पुरानी हो गई है फटने भी लगी है आज एक साड़ी नई लेता आऊंगा।।
😞😞😞😞😞
पत्नी:–”अरे नही जी..!”
 “ये तो अभी ठीक है..!”
 “आप तो अपने लिये
 जूते ही लेते आना कितने पुराने हो गये हैं और फट भी तो गये हैं..!”

जब
 किसान मंडी पहुँचता है।

ये उसकी मजबूरी है..
वो अपने माल की कीमत खुद नहीं लगा पाता।

व्यापारी
 उसके माल की कीमत
 अपने हिसाब से तय करते हैं...

एक
 साबुन की टिकिया पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.।

एक
 माचिस की डिब्बी पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.।

लेकिन किसान
 अपने माल की कीमत खु़द नहीं कर पाता .।

खैर..
माल बिक जाता है,
लेकिन कीमत
 उसकी सोच अनुरूप नहीं मिल पाती.।

माल तौलाई के बाद
 जब पेमेन्ट मिलता है..

वो सोचता है..
इसमें से दवाई वाले …