सागर को छुआ तो लहरो की याद आई

सागर को छुआ तो लहरो की याद आई
आसमा को छुआ तो तारो की याद आई
काँटो को छुआ तो फूलो की याद आई
मोबाइल को छुआ तो अपने ग्रुप के दोस्तो की याद आ गई
          

Comments

Popular posts from this blog

"बैठना भाइयों के बीच, चाहे "बैर" ही क्यों ना हो.. और खाना माँ के हाथो का, चाहे "ज़हर" ही क्यों ना हो..

एक लड़की की शादी हुई और उसकी सहेली को उसकी सुहागरात के बारे में जानने की बड़ी ही उत्सुकता थी।

अक्ल बांटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारें,