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"बैठना भाइयों के बीच, चाहे "बैर" ही क्यों ना हो.. और खाना माँ के हाथो का, चाहे "ज़हर" ही क्यों ना हो..

एक लड़की की शादी हुई और उसकी सहेली को उसकी सुहागरात के बारे में जानने की बड़ी ही उत्सुकता थी।

अक्ल बांटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारें,